ब्रह्मचर्य मानवी वीर्यवान बनाते है,
त्यागसे वैराग्य बढता है।
दर्द मिट जानेसे , संकट टलते है,
ज्ञान पचनेसे, बुद्धि जागृत होती है।
गृहस्थाश्रमी तीनो आश्रमी को पोषते है,
संयम व्यभिचार कम करने सकते है।
जब लोभ बढ़ता है, वह समय लुटता है,
संशय दूर होते हैं, द्विधाएं दूर होती हैं।
वानप्रस्थी मेरातेरा कम करते है,
वह अज्ञानी को प्रेरणा दते है।
माफ़ करने सज्जनताकी वृद्धि होती है,
संतोष पचनेसे पायी शांति शुद्ध होती है।
संन्यासी धर्म बताया कर श्रद्धा बढाते है,
मुमुक्षी बनके मोक्ष चाहना अच्छी बात है।
वैज्ञानिको संत मिलसे सहयोगी बनते है।,
ऋषि शास्त्र संशोधन करके शुद्ध करते है।

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